
86 मैच, 2316 रन, 3 शतक, 7 अर्धशतक और इंग्लैंड के सबसे युवा कप्तान बनने का सम्मान… इतना सब कुछ हासिल करने वाले मोंटी बाउडेन की मौत हर किसी की रूह कंपा देती है. महज 26 साल की उम्र में आज से 131 साल पहले यानी 19 फरवरी 1892 को इंग्लैंड के सबसे युवा कप्तान मोंटी ने दुनिया को अलविदा कह दिया था. उनकी मौत की वजह उनके अपने ही बैल बने. दरअसल वो अपनी बैलगाड़ी से नीचे गिर थे, जिस वजह से उनके अपने ही बैलों ने उन्हें खुरों से कुचल डाला. उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, मगर वो बच नहीं पाए.
मोंटी छोटी सी उम्र में दुनिया छोड़ गए. इसके बाद उनके शव को भूखे शेरों से बचाने के लिए अस्पताल के स्टाफ को संघर्ष करना पड़ा. दरअसल उन्हें जिस अस्पताल में ले जाया गया था, वो एक झोपड़ी से ज्यादा कुछ नहीं था, जहां हर किसी को चिंता सता रही थी कि शव को भूखे शेरों से कैसे बचाया जाए. इसके बाद इंग्लिश कप्तान को व्हिस्की के केस से बने कॉफिन में दफनाया गया.
23 साल की उम्र में कप्तानी
छोटी उम्र में दुनिया छोड़ने वाले मोंटी की दर्दनाक मौत की कहानी सुन हर कोई अंदर तक सहम गया था. 1 नवंबर 1865 को सरे में जन्में मोंटी को इंग्लैंड का भविष्य माना जा रहा था. 23 साल 144 दिन की उम्र में ही उन्हें साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच के लिए इंग्लिश टीम की कमान दी गई थी. उन्होंने अपने करियर में 2 ही इंटरनेशनल मैच खेले थे. साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट से पहले इंग्लिश कप्तान स्मिथ बीमार हो गए थे और उनकी गैर मौजूदगी में मोंटी को कप्तान बनाया गया.
नहीं लौटे थे घर
इतना ही नहीं मोंटी ने अपनी कप्तानी में टीम को जीत भी दिला थी. इस सीरीज के बाद वो घर नहीं लौटे और साउथ अफ्रीका में किसी काम के लिए रुक गए और वहीं से रोडेशिया चले गए और यहीं पर 1892 में उनकी मौत हो गई. मोंटी ने 2 इंटरनेशनल टेस्ट में इंग्लैंड के लिए 25 रन बनाए. जबकि 86 फर्स्ट क्लास मैचों में 3 शतक और 7 अर्धशतक सहित कुल 2316 रन बनाए.
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