
ढाका टेस्ट के पहले दिन भारत ने बांग्लादेश को सिर्फ 227 रन पर निपटा दिया. जाहिर तौर पर भारतीय गेंदबाजों ने कमाल का प्रदर्शन किया. ऐसे में चर्चा टीम इंडिया के इस प्रदर्शन की होनी चाहिए थी लेकिन दूसरे टेस्ट के पहले दिन चर्चा का केंद्र सिर्फ एक नाम रहा- कुलदीप यादव. बाएं हाथ के भारतीय स्पिनर को पहले टेस्ट में प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड जीतने के बाद भी इस टेस्ट से बाहर कर दिया गया और इसने बवंडर खड़ा कर दिया. अब पूर्व दिग्गज भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने एक ऐसा सुझाव दिया है, जिससे शायद उन्हें टीम इंडिया में लगातार जगह मिलती रहे.
कुलदीप यादव ने लंबे समय के बाद टेस्ट टीम में वापसी की थी और पहले ही मौके में कमाल करते हुए 8 विकेट हासिल किए थे. इसमें बांग्लादेश की पहली पारी में 5 विकेट भी शामिल थे, जबकि बल्लेबाजी में भी 40 रनों का अहम योगदान भी था. भारत ने 188 रन से मैच जीता लेकिन अगले ही टेस्ट में उन्हें बैठाकर तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट को शामिल किया, जिन्होंने 12 साल बाद अपना पहला टेस्ट मैच खेला.
हरभजन की कुलदीप को खास ‘सलाह’
वैसे ही कुलदीप को कम मौकेे मिलते रहे हैं और ऐसे में अच्छे प्रदर्शन के बाद इस तरह से ड्रॉप करना किसी को रास नहीं आया और सबने टीम मैनेजमेंट पर सवाल करते हुए कोच और कप्तान को खरी खोटी सुनाई. हरभजन सिंह भी अलग नहीं थे और उन्होंने तो टीम मैनेजमेंट पर तंज कसते हुए कुलदीप को खास ‘सलाह’ तक दे डाली. हरभजन ने पीटीआई से कहा,
“मुझे लगता है कि अब से कुलदीप को पांच विकेट लेना बंद कर देना चाहिए. क्या पता इससे उसे लगातार दो टेस्ट मैच खेलने का मौका मिल जाए.”
हरभजन ने पिछले मौकों का भी जिक्र किया, जब कुलदीप को अच्छे प्रदर्शन के बावजूद ड्रॉप कर दिया गया. पूर्व ऑफ स्पिनर ने कहा, “चटगांव टेस्ट से पहले पिछली बार उसने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में अलग हालत में पांच विकेट चटकाए थे. उसे विदेशों में भारत का नंबर एक स्पिनर होना चाहिए था, लेकिन उसे टेस्ट खेलने के लिए दो साल तक इंतजार करना पड़ा. अब उसे लगभग दो साल बाद दोबारा टेस्ट खेलने का मौका मिला और उसे फिर टीम से बाहर कर दिया गया. इसके पीछे का तर्क जानने में खुशी होगी.”
‘खिलाड़ियों में नहीं सुरक्षा का भाव’
टेस्ट क्रिकेट में 400 से ज्यादा विकेट लेने वाले टर्बनेटर के नाम से मशहूर दिग्गज स्पिनर हरभजन ने टीम इंडिया को लताड़ते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट में सुरक्षा सिर्फ एक शब्द बनकर रह गया है. उन्होंने कहा, “मैं किसी खिलाड़ी का नाम नहीं लेना चाहता लेकिन टेस्ट ढांचे में कुछ खिलाड़ियों को लंबे समय तक मौके मिले, पांच साल तक भी. कुलदीप के मामले में लगता है कि इस तरह की सुरक्षा की मियाद सिर्फ पांच दिन है. अगर किसी को आठ विकेट चटकाने के बाद भी बाहर कर दिया जाएगा तो फिर वह कैसे सुरक्षित महसूस करेगा. क्या वह निडर होकर खेल सकता है जबकि टीम प्रबंधन ने उसके अंदर डर भर दिया है.”
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