
भारतीय क्रिकेट टीम रविवार 13 सितंबर की शाम को जब दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में उतरेगी, तो उसके सामने एक ही लक्ष्य होगा- विमेंस एशिया कप की ट्रॉफी पर कब्जा. इस लक्ष्य के साथ वो श्रीलंका से 2 साल पहले इसी टूर्नामेंट के फाइनल में मिली हार का बदला भी ले सकेगी. मगर इसके लिए टीम इंडिया को अपनी 100 फीसदी क्षमता के साथ प्रदर्शन करना होगा और इस मामले में फिलहाल नाकामी मिल रही है. वजह है बल्लेबाजी, जिसमें स्टार ओपनर स्मृति मंधाना का औसत प्रदर्शन एक वजह है.
दुबई में चल रहे इस टूर्नामेंट भारतीय टीम ने लगातार चार मैच जीतकर फाइनल में जगह बनाई है. मगर इसमें से किसी भी मैच में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेदाग नहीं रहा. खास तौर पर फील्डिंग और बैटिंग के मोर्चे पर हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम ने निराश किया है. बैटिंग में तो खुद कप्तान कौर फ्लॉप रही हैं. मगर उनके अलावा टॉप ऑर्डर में मंधाना के बल्ले की खामोशी भारी पड़ रही है.
टीम की उप-कप्तान और सबसे सफल बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने इस टूर्नामेंट में अभी तक 4 मैच में 154 रन बनाए हैं और लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं. इस तरह से तो आंकड़े ठीक लगते हैं. मगर इसका दूसरा पहलू ये है कि उनके 154 रन में से 124 रन तो सिर्फ एक पारी में आए हैं. मंधाना ने ये शतकीय पारी हॉन्ग कॉन्ग के खिलाफ खेली थी. मगर इसके अलावा बाकी 3 पारियों में वो सिर्फ 30 रन बना सकी हैं, जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ 9 रन और सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ 5 गेंदों में सिर्फ 2 रन भी शामिल हैं.
अब अगर टीम को शुरुआत ही अच्छी नहीं मिल रही है तो इसका असर आगे स्कोर पर दिखता है. ये इसलिए अहम है क्योंकि मंधाना की ओपनिंग पार्टनर शेफाली वर्मा ने निरंतर रन बनाए हैं. उन्होंने 4 पारियों में सबसे ज्यादा 168 रन बनाए हैं, जिसमें से बांग्लादेश के खिलाफ अर्धशतक समेत 2 फिफ्टी हैं. ऐसे में अगर मंधाना भी फाइनल में अपने प्रदर्शन में सुधार करती हैं और शेफाली इसी निरंतरता के साथ रन बटोरती हैं तो टीम इंडिया के लिए जीत की संभावना बढ़ जाएगी.
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