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IND vs AUS: वजन सिर्फ 156 ग्राम, ओवल में होगा ऑस्ट्रेलिया का काम तमाम

IND vs AUS: वजन सिर्फ 156 ग्राम, ओवल में होगा ऑस्ट्रेलिया का काम तमाम

नई दिल्ली: आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल सात जून से 11 जून के बीच इंग्लैंड के द ओवल में खेला जाना है. भारतीय टीम दूसरी बार इस चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंची है तो वहीं ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार फाइनल में कदम रखा है. दोनों ही टीमें इंग्लैंड पहुंच गई हैं और अभ्यास में जुट गई हैं. लेकिन इस मैच में ऑस्ट्रेलिया के लिए एक चिंता की बात है. कारण है इस मैच में इस्तेमाल होने वाली गेंद. आईसीसी ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि खिताबी मुकाबले में ड्यूक गेंद का इस्तेमाल किया जाएगा.

इंग्लैंड में ड्यूक गेंद का ही इस्तेमाल किया जाता है. भारतीय टीम के खिलाड़ी आईपीएल से ही इस गेंद का अभ्यास कर रहे हैं लेकिन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को इंग्लैंड पहुंचने के बाद ही इस गेंद से अभ्यास करने का मौका मिला है. ऐसे में ये ऑस्ट्रेलिया के लिए चिंता का विषय हो सकता है.

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कैसी होती है ड्यूक गेंद

ड्यूक गेंद सबसे ज्यादा स्विंग करने वाली गेंद मानी जाती है. ऑस्ट्रेलिया में इस्तेमाल होने वाली कुकाबुरा और भारत में इस्तेमाल होने वाली एसजी गेंद की तुलना में ये लाल गेंद ज्यादा स्विंग होती है. इसका एक कारण इंग्लैंड की परिस्थितियां भी होती हैं. ड्यूक गेंद को तीनों गेंदों में सबसे अच्छी गेंद माना जाता है और बीते कुछ समय से टेस्ट में सभी जगह इस गेंद को इस्तेमाल करने की बात की जा रही है.

ड्यूक गेंद बाकी की गेंदों की तुलना में ज्यादा देर तक चलती है. साथ ही ये गेंद ज्यादा देर तक शेप में रहती है. बाकी की गेंदों का शेप इस गेंद की तुलना में जल्दी बिगड़ जाता है. इसका कारण इसकी बनावट और इसकी कई लेयर हैं. ये गेंद शाइन और सीम को लंबे समय तक बनाए रखती है. जिस लैदर से ये गेंद इस्तेमाल की जाती है वो मोटा रहता है. एसजी और कुकाबरा की गेंदें टू पीस रहती हैं यानी दो लैदर पीस यूज किए जाते हैं जबकि ड्यूक गेंद फोर पीस होती है.

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इस कारण मिलते हैं बेहतर परिणाम

गेंद कितनी देर तक यूज की जा सकती है ये बात इस पर निर्भर करता है कि गेंद की पोलिश और इसकी सिलाई कैसी हुई है. अगर सिलाई कमजोर होगी तो गेंद जल्दी फट जाएगी और पोलिश कम होगी तो गेंद जल्दी अपनी चमक खो देगी. इस गेंद पर डीप पोलिश की जाती है और फिर हाथ से इसकी मजबूत सिलाई की जाती है. ये गेंद बाकी गेंदों की तुलना में ज्यादा लाल रहती है और इसका कारण इसकी पोलिशिंग का प्रोसेस है.

वजन पर रहता है ध्यान

क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था एमसीसी के मुताबिक पुरुष क्रिकेट में इस्तेमाल की जाने वाली गेंद का वजन 156 से 163 ग्राम के बीच होना चाहिए.यानी 156 ग्राम से कम नहीं और 163 ग्राम से ज्यादा नहीं. वजन तय करने के पीछे एक वजह ये हो सकती है कि अगर ज्यादा भारी गेंद का इस्तेमाल किया जाता है तो इससे खिलाड़ियों को चोट लगने का खतरा ज्यादा होगा.वहीं अगर हल्की रहती है तो फिर गेंद को नियंत्रित करना मुश्किल होगा.

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ऑस्ट्रेलिया के लिए परेशानी

ऑस्ट्रेलियाई टीम इस गेंद से ज्यादा अभ्यास नहीं कर पाई है और इसी कारण भारत का पलड़ा भारी होगा. क्योंकि भारतीय खिलाड़ी इस गेंद से पहले से अभ्यास करते आ रहे हैं. भारतीय टीम के पास गेंद को अच्छी तरह स्विंग कराने वाले गेंदबाज हैं. फिर चाहे वो मोहम्मद शमी हो या मोहम्मद सिराज या उमेश यादव.ये गेंदबाज ड्यूक गेंद का अच्छा इस्तेमाल करने का दम रखते हैं.



source https://www.tv9hindi.com/sports/cricket-news/icc-wtc-final-duke-ball-weight-and-making-indian-cricket-team-australian-cricket-team-indian-cricket-team-ind-vs-aus-1896177.html

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