वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2022 को अपना चौथा बजट पेश करने की तैयारी में हैं। कोविड महामारी के बीच पेश हो रहे इस बजट में सबकी निगाहें केंद्र सरकार पर है, कि कैसे वह भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाती है। देश का बजट सामने आना अपने आप में ही एक बहुत बड़ी घड़ी है। ऐसे में आपने यह सोचा है कि क्यों हर साल 1 फरवरी को सुबह 11 बजे ही बजट को पेश किया जाता है?
1 फरवरी को क्यों पेश किया जाता है बजट?
यह बदलाव 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान हुआ था। इससे पहले फरवरी के अंतिम वर्किंग डे पर केंद्रीय बजट पेश किया जाता था। हालांकि, उस दौर को पीछे छोड़ते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अब से बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा।
फरवरी के अंतिम वर्किंग डे पर शाम 5 बजे बजट क्यों पेश किया जाता था?
इससे पहले, केंद्रीय बजट को फरवरी के अंतिम वर्किंग डे पर शाम 5 बजे पेश किया जाता था और यह प्रथा 1999 तक अस्तित्व में थी। इसका पालन एक परंपरा के रूप में किया गया था जिसे ब्रिटिश राज ने लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में अपने सांसदों के अनुसार तय किया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नई दिल्ली (ग्रीनविच मीन टाइम से +5.30 घंटे आगे) और वेस्टमिंस्टर (यूके) के बीच समय का अंतर था। भारतीय समय बीएसटी (ब्रिटिश ग्रीष्मकालीन समय) से 4.5 घंटे आगे था।
इसे कब और क्यों वर्तमान तिथि और समय में बदल दिया गया?
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान 1998 से 2002 तक भारत के वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने 1999 के केंद्रीय बजट की टाइमिंग को सुबह 11 बजे घोषणा करके इस रस्म को बदल दिया। कहा गया था कि समय परिवर्तन से संख्याओं और घोषणाओं का बेहतर विश्लेषण हो सकता है और बजट पर बेहतर तर्कसंगत और सूचित बहस हो सकती है। अनुरोध पर ध्यान दिया गया और 27 फरवरी, 1999 को सिन्हा ने स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार सुबह 11 बजे बजट पेश किया।
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